Digital Arrest in India
Digital Arrest in India: ऑनलाइन ठगी का नया खतरनाक तरीका
भारत में तेजी से बढ़ती डिजिटल सेवाओं के साथ-साथ साइबर अपराध भी बढ़ रहे हैं। हाल के समय में “डिजिटल अरेस्ट” नाम की एक नई ऑनलाइन ठगी सामने आई है, जिसने कई लोगों को लाखों रुपये का नुकसान पहुँचाया है। आइए समझते हैं कि डिजिटल अरेस्ट क्या है, यह कैसे काम करता है और इससे कैसे बचा जा सकता है।
Digital Arrest क्या है?
“डिजिटल अरेस्ट” कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। यह साइबर ठगों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एक फर्जी डराने वाला तरीका है। इसमें अपराधी खुद को पुलिस, CBI, ED, RBI या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल या फोन कॉल के जरिए व्यक्ति को डराते हैं।
वे कहते हैं कि:
- आपका आधार कार्ड/पैन कार्ड मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल हुआ है
- आपके खिलाफ वारंट जारी हो गया है
- आपका बैंक अकाउंट फ्रीज किया जा सकता है
- आपको तुरंत “डिजिटल कस्टडी” में लिया जा रहा है
इसके बाद वे व्यक्ति को घंटों वीडियो कॉल पर रखते हैं और बैंक डिटेल्स या पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।
Digital Arrest Scam कैसे काम करता है?
- फर्जी कॉल या व्हाट्सऐप वीडियो कॉल
- नकली पुलिस ID या सरकारी लोगो दिखाना
- डराने के लिए फर्जी FIR या वारंट दिखाना
- “जांच” के नाम पर बैंक डिटेल्स मांगना
- पैसे को “वेरिफिकेशन” या “सेफ अकाउंट” में ट्रांसफर करवाना
कई मामलों में पीड़ित को 4–8 घंटे तक वीडियो कॉल पर बैठाकर रखा जाता है।
भारत में बढ़ते मामले
Ministry of Home Affairs और Indian Cyber Crime Coordination Centre के अनुसार, 2024–2026 के बीच इस तरह की साइबर ठगी के मामलों में तेजी आई है।
सरकार ने 1930 हेल्पलाइन और cybercrime.gov.in पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज करने की सुविधा दी है।
कैसे बचें Digital Arrest Scam से?
- याद रखें: कोई भी पुलिस या सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर “डिजिटल अरेस्ट” नहीं करती।
- कभी भी OTP, बैंक डिटेल्स या आधार नंबर साझा न करें।
- घबराएं नहीं – पहले कॉल काटें और नजदीकी पुलिस स्टेशन से संपर्क करें।
- 1930 पर तुरंत कॉल करें अगर पैसा ट्रांसफर हो गया हो।
- केवल आधिकारिक वेबसाइट या हेल्पलाइन से जानकारी लें।
सरकार की चेतावनी
Reserve Bank of India और Central Bureau of Investigation ने स्पष्ट किया है कि वे कभी भी फोन या वीडियो कॉल पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए नहीं कहते।
निष्कर्ष
डिजिटल अरेस्ट एक मनोवैज्ञानिक दबाव डालने वाली साइबर ठगी है। इसका उद्देश्य लोगों को डराकर उनसे पैसे ऐंठना है। जागरूकता ही इससे बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।
अगर आपको ऐसा कोई कॉल आए तो घबराएं नहीं — सोचें, जांचें और फिर ही कदम उठाएं।